तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचे वायुसेना के वीर सपूत, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचे वायुसेना के वीर सपूत, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

The brave Air Force son returned to his village

The brave Air Force son returned to his village

The brave Air Force son returned to his village, तिरंगे में लिपटा एक बेटा जब अपने गांव लौटा, तो पूरा इलाका नम आंखों के साथ उसके स्वागत में खड़ा नजर आया. अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र के सालपुर गांव में उस वक्त हर दिल दुख से भरा हुआ था, लेकिन गर्व भी उतना ही था, जब भारतीय वायुसेना के बहादुर जवान सार्जेंट जितेंद्र शर्मा का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पहुंचा. शहीद को विदाई देने हजारों लोग उमड़ पड़े और पूरा गांव देशभक्ति के नारों से गूंज उठा.

असम हादसे में शहीद हुए थे जितेंद्र शर्मा

सार्जेंट जितेंद्र शर्मा असम के जोरहाट में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में शहीद हो गए थे. जैसे ही उनके शहीद होने की खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. हर किसी के चेहरे पर दुख के साथ-साथ अपने वीर सपूत को खोने का दर्द साफ झलक रहा था.

शहीद का पार्थिव शरीर सबसे पहले गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन लाया गया, जहां सेना और वायुसेना के अधिकारियों ने उन्हें सलामी देकर श्रद्धांजलि दी. इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ सड़क मार्ग से उनके पैतृक गांव सालपुर लाया गया.

गांव पहुंचते ही उमड़ा जनसैलाब

जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा. हाथों में तिरंगा लिए लोग बाइक, ट्रैक्टर और पैदल उनके अंतिम यात्रा में शामिल हुए. गांव की गलियों में "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम्" के नारे लगातार गूंजते रहे.

परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

इस भावुक माहौल के बीच शहीद के परिजन अपने आंसू नहीं रोक पाए. परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था. गांव के लोग और रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधाते नजर आए. हर किसी की आंख नम थी, लेकिन दिल में शहीद के लिए गर्व भी था. अंतिम यात्रा में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सेना के अधिकारी भी मौजूद रहे. सभी ने शहीद जितेंद्र शर्मा को पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी वीरता और राष्ट्रसेवा को नमन किया. उनकी अंतिम विदाई पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ की गई.

गांव को गौरवान्वित कर गए वीर सपूत

सार्जेंट जितेंद्र शर्मा की शहादत ने पूरे अलीगढ़ को गर्व महसूस कराया है. उनका बलिदान सिर्फ उनके परिवार या गांव के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया है. लोग उन्हें याद कर यही कह रहे हैं कि ऐसे वीरों की वजह से ही देश सुरक्षित है.